शनिवार 25 जुलाई 2026 - 09:48
पक्का ईमान ही इंसान को निडर बनाता है!

आज तक जितनी भी महान हस्तियों का अन्यायपूर्वक ख़ून बहाया गया है, उसका मुख्य कारण यही रहा है कि या तो लोगों में सही समझ (बसीरत) की कमी थी या फिर ईमान कमज़ोर था। इसी कारण इंसान ज़ालिम से डरता है और उसके ख़िलाफ़ खड़ा नहीं हो पाता। इसलिए केवल एक अल्लाह पर अटूट ईमान ही इंसान को निडर बनाता है।

लेखिका: फ़ातिमा निसा

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी। केवल यह मान लेना कि ज़ुल्म बुरा है, पर्याप्त नहीं है, क्योंकि अच्छाई और बुराई को पहचानने की क्षमता अल्लाह ने हर इंसान की फ़ितरत (स्वाभाविक प्रकृति) में रखी है। इसका कारण यह है कि "हुस्न व क़ुब्ह अक़्ली" अर्थात मानव बुद्धि स्वयं यह मांग करती है कि अच्छाई को अपनाया जाए और बुराई से दूर रहा जाए।

यद्यपि यह स्वाभाविक भावना हर इंसान के भीतर मौजूद होती है, लेकिन कुछ लोग इसे जीवित रखते हुए अपने जीवन में भी उतारते हैं, चाहे उसका परिणाम उनके पक्ष में हो या उनके विरुद्ध। जबकि कुछ लोग केवल अपने स्वार्थ के अनुसार ही अच्छाई और बुराई को स्वीकार करते हैं। यदि कोई बात उनके हित में न हो तो अच्छी चीज़ भी उन्हें बुरी लगती है, और यदि उनके हित में हो तो बुरी चीज़ भी उन्हें अच्छी दिखाई देती है।

जब इंसान अपनी फ़ितरत को इस प्रकार की गंदगी में डाल देता है, अर्थात जिस पवित्र प्रकृति पर अल्लाह ने उसे पैदा किया है उसके विरुद्ध आचरण करता है, तब अल्लाह उसकी निंदा करते हुए फ़रमाता है:

"और सत्य को असत्य के साथ न मिलाओ और न ही जानते-बूझते सत्य को छिपाओ।" (सूर ए अल-बक़रह, आयत 42)

कई बार ऐसा नहीं होता कि इंसान जानबूझकर असत्य का साथ देता है, बल्कि सत्य और असत्य इस प्रकार आपस में मिल जाते हैं कि उनमें अंतर करना कठिन हो जाता है। लेकिन यदि इंसान अपने मन का सुधार करे और अल्लाह से सहायता मांगे, तो वह सत्य और असत्य की पहचान कर सकता है। जैसा कि क़ुरआन में अल्लाह फ़रमाता है:

"ऐ ईमान वालो! यदि तुम अल्लाह से डरोगे, तो वह तुम्हें सत्य और असत्य में भेद करने की शक्ति प्रदान करेगा, तुम्हारे गुनाहों को तुमसे दूर कर देगा और तुम्हें क्षमा करेगा। और अल्लाह बड़े अनुग्रह वाला है।"
(सूरह अल-अनफ़ाल, आयत 29)

आज तक जितनी भी महान हस्तियों का अन्यायपूर्वक ख़ून बहाया गया है, उसका कारण यही रहा है कि या तो लोगों में बसीरत की कमी थी या उनका ईमान कमज़ोर था। इसी वजह से इंसान ज़ालिम से डरता है और उसके सामने खड़ा नहीं हो पाता। इसलिए केवल एक अल्लाह पर दृढ़ और अटूट ईमान ही इंसान को निडर बनाता है।

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